Dron Sahu
Others
मुझे हर बात पर ,
"क्यों" बोलने दो।
मेरे अंदर बातों को ,
इधर -उधर डोलने दो।
मेरे ज्ञान के द्वार ,
इस "क्यों"से खोलने दो।
मेरी आदत की चाय में ,
"क्यों" की चीनी घोलने दो।
तुम्हारी बात को मानूँ "क्यों"?
उत्तर मुझे टटोलने दो।
कविता क्या है...
पानी है ज़िंदग...
मछली और पानी
ग़म तो अपनी ज़ि...
ओ हवा !
मेरी परछाई
जहाँ सोच ,वहा...
क्यों
हमारी भाषा की...