क्या लड़कियां वाकई कमजोर होती हैं?
क्या लड़कियां वाकई कमजोर होती हैं?
वह तो अपना लेती है उनलोगों को
पर खुद को हमेशा पराई ही पाती है,
क्या लड़कियां वाकई कमजोर होती है?
अगर रखे वह अपना विचार तो
मुँह पर बोलने वाली कहलाती है,
झूठ को झूठ कहे तो कहा लोग उसके विचार को अपना पाते है,
फिर भी वह सब का ख्याल रखती है,
लड़कियां वाकई कमजोर होती है?
बार बार उसे अहसास दिलाया जाएगा कि वह गलत ओर हम सही,
फिर वह अपना विचार
कहा किसीको कह पाती है,
लड़कियां वाकई कमजोर होती है?
इन सबके बीच वह कहा खुद के विचारों से जी
पाती है,
लड़कियां वाकई कमजोर होती है?
वैसे तो कहते है कि बहु हमारी बिटिया सी है,
पर क्या वाक़ई उसे बेटी के रूप में स्वीकार कर पाते है लोग?
सब कुछ जानकर भी वह बहुत कुछ संभालती है भारी दिल हो उसका फिर भी होठों पे मुस्कान पे रखती है,
क्या लड़कियां वाकई कमजोर होती है?
