जब मैं मुझसे मिला
जब मैं मुझसे मिला
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खुद में खोकर जमाने को ढूंढने की कोशिश में,
वो पहले ही पल में पहचाना गया, जब मैं मुझसे मिला।
दिखाई दिया आईने में छिपा हुआ वो चेहरा,
हर रोज़ देखा पर आज मिला, जब मैं मुझसे मिला।
बदल गए आंसू के बून्द गालों की चमक में,
दर्द के साथ हँसी हुई हाजिर, जब मैं मुझसे मिला।
आँखों से देखा है टूटे हुए और संजोये कुछ ख्वाब ,
सच तो नहीं हुए फिर भी छू गए, जब मैं मुझसे मिला।
न याद रहे गमके दर्द और रही नहीं सुख की ख़ुशी,
हुई बस मस्ती ही मस्ती खुद से, जब मैं मुझसे मिला।
जित गए अल्फ़ाज़ दिल के सारे शब्दकोश के सामने,
और बिना व्याकरण के सज गए जब में मुझसे मिला।
