हमने सवेरे जी लिये
हमने सवेरे जी लिये
1 min
259
हमने सवेरे जी लिये और शामें ढलती छोड़ दीं
फिर चराग़ों को बुझाके आँखे जलती छोड़ दीं
राह की दुश्वारियों से ख़ूब तजुर्बे किये
मंजिलें तो ख़्वाब की ख़ातिर मचलती छोड़ दीं
जो हो गया सो हो गया हमने फिर सोचा नहीँ
दिल के कोने मे कहीँ यादें पिघलती छोड़ दीं
ख़ुद का तार्रुफ़ हमने कराया कुछ इस तरह,
रेत मुट्ठी मे उठा ली फिर फिसलती छोड़ दी,
दुनिया ने धूप – छाँव के मन्ज़र दिये हमें
रोशनी हमने भी अँधेरों मे पलती छोड़ दी
