हमने सवेरे जी लिये
हमने सवेरे जी लिये
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हमने सवेरे जी लिये और शामें ढलती छोड़ दीं
फिर चराग़ों को बुझाके आँखे जलती छोड़ दीं
राह की दुश्वारियों से ख़ूब तजुर्बे किये
मंजिलें तो ख़्वाब की ख़ातिर मचलती छोड़ दीं
जो हो गया सो हो गया हमने फिर सोचा नहीँ
दिल के कोने मे कहीँ यादें पिघलती छोड़ दीं
ख़ुद का तार्रुफ़ हमने कराया कुछ इस तरह,
रेत मुट्ठी मे उठा ली फिर फिसलती छोड़ दी,
दुनिया ने धूप – छाँव के मन्ज़र दिये हमें
रोशनी हमने भी अँधेरों मे पलती छोड़ दी
