STORYMIRROR

Amaan Iqbal

Others

3  

Amaan Iqbal

Others

हमने सवेरे जी लिये

हमने सवेरे जी लिये

1 min
257

हमने सवेरे जी लिये और शामें ढलती छोड़ दीं

फिर चराग़ों को बुझाके आँखे जलती छोड़ दीं


राह की दुश्वारियों से ख़ूब तजुर्बे किये

मंजिलें तो ख़्वाब की ख़ातिर मचलती छोड़ दीं


जो हो गया सो हो गया हमने फिर सोचा नहीँ

दिल के कोने मे कहीँ यादें पिघलती छोड़ दीं


ख़ुद का तार्रुफ़ हमने कराया कुछ इस तरह,

रेत मुट्ठी मे उठा ली फिर फिसलती छोड़ दी,


दुनिया ने धूप – छाँव के मन्ज़र दिये हमें

रोशनी हमने भी अँधेरों मे पलती छोड़ दी



Rate this content
Log in