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Abhishek Singh

Others

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Abhishek Singh

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हिंद की राजकुमारी !

हिंद की राजकुमारी !

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क्यूँ ख़ाक किया क़ुर्बान,

किया जीवन अपना दान।


बचाया मिट्टी का अभिमान,

जब ना होना था तेरा ही सम्मान।


क्यूँ ख़ुद का दिया बलिदान,

महिला होना था अभिमान।


जब न जन्मा था हैवान,

क्यूँ ख़ाक किया क़ुर्बान।


किया जीवन अपना दान

जब पुरुषों में था न पुरुषार्थ।


बढ़ाया महिलाओं का स्वाभिमान,

दिलाया बराबरी का सम्मान।


उड़ाया गगन में ख़ूब विमान,

फिर क्यों पीड़ित तेरी ही संतान।


जिसका बेटी दिया तूने नाम।

क्यूँ बदलता न इंसान।


क्यूँ समझता न इंसान,

क्यूँ पालता ये हैवान!


अब तो समझो रे इंसान,

अब तो समहलो रे इंसान।


घर में पालो न हैवन,

घर में पालो न शैतान।


बेटियाँ होती हैं धनवान,

बेटियाँ होती हैं सम्मान,

बेटियाँ होती हैं अभिमान।


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