STORYMIRROR

Harshita Dawar

Others

2  

Harshita Dawar

Others

गरम हाथ

गरम हाथ

1 min
264

तुम्हारे गरम हाथ

की गर्मियाश आज भी मौजूद है,

मेरे हाथों की लकीरों में।

जब भी क़लम थामती हूं,

वो गर्मीं मेरे शब्दों की है,

या तुम्हारे हाथों की हरारत की?


उंगलियों में एहसासों की मेंहदी है

या जज़्बातो की स्याही शाही अंदाज़

में बिखेरते मोती मेरी क़लम के जो

मुझे ख़ुद से पहचान करवाती है।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन