गंगा दशहरा पर्व
गंगा दशहरा पर्व
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गंगा जी तेरे घाट पर
जन जन करे पुकार
कोई कुछ मांगे मुझसे
किसी के पूरे हो गए सपने
श्रद्धा सुमन अर्पित करते
जल में गोते खूब लगाए
शीतल जल में शामिल
देखो ऊंची ऊंची लहरें
जंजीर से लगे हैं बन्धन
उन्हें पकड़ कर नहा लो
हंसी खुशी से फिर तो
प्रेरणा अपने घर पर आ लो
और ये दोहा गुनगुना लो
मन चंगा तो कठौती में गंगा।
