घनश्याम भजन
घनश्याम भजन
1 min
413
मधुबन की लताओं में घनघोर घटाओ में घनश्याम तुम्हें देखा
सिर मोर मुकुट तीर छे
तिर छे हो खड़े नटवर
होंठों पे हरि मुरली घनश्याम.....
यमुना का किनारे हो
ओर चंचल धारा हो
वहाँ रास रजाते हुए घनश्याम....
कौरव की सभा में तुम
पांडव की सभा में तुम
वहाँ चीर बढ़ाते हुए वहाँ लाज
बचाते हुए घनश्याम.....
दुनिया की अवस्था में
सनमुख ही रहो मेरे
सपनों में आ जाओ घनश्याम......
