STORYMIRROR

OM Maind

Others

3  

OM Maind

Others

घनश्याम भजन

घनश्याम भजन

1 min
413

मधुबन की लताओं में घनघोर घटाओ में घनश्याम तुम्हें देखा

सिर मोर मुकुट तीर छे

 तिर छे हो खड़े नटवर

होंठों पे हरि मुरली घनश्याम.....

          यमुना का किनारे हो

          ओर चंचल धारा हो

         वहाँ रास रजाते हुए घनश्याम....

कौरव की सभा में तुम

पांडव की सभा में तुम

वहाँ चीर बढ़ाते हुए वहाँ लाज

बचाते हुए घनश्याम.....

             दुनिया की अवस्था में

          सनमुख ही रहो मेरे

         सपनों में आ जाओ घनश्याम......

       


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन