तुम्हारे हाथों का स्पर्श अब भी मेरी तुम्हारे हाथों का स्पर्श अब भी मेरी
पापा की हथेलियां थपकी स्नेह की जब भी कभी कदम डगमगाये हौसले से उनके आने वाला पल मुस्कराये ! पापा की हथेलियां थपकी स्नेह की जब भी कभी कदम डगमगाये हौसले से उनके आने वाला ...
विदा होती बेटी...। विदा होती बेटी...।
हर उस डूबते तिनके को तेरी आवाज़, आज भी है सहारा ! हर उस डूबते तिनके को तेरी आवाज़, आज भी है सहारा !
एक नज़र में तुम उसे क्या ही जान पाओगे ? एक नज़र में तुम उसे क्या ही जान पाओगे ?
बेटी तुझे कभी न मेरी, कमी का एहसास हो, तेरा ससुराल इतना, अच्छा और खास हो...! बेटी तुझे कभी न मेरी, कमी का एहसास हो, तेरा ससुराल इतना, अच्छा और खास हो...!