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Krishna Khatri

Others

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Krishna Khatri

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धड़कनें !

धड़कनें !

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जज़्बात जब

देते हैं दस्तक

दिल की दहलीज पर,

कलेजे में उठती है हूक

हर लम्हा,

महसूस करता है

जज़्बात की तासीर,

और दिमाग

भूल जाता है सोचना

बस ,

लग जाता है धड़कने

दिल के साथ,

दिल और दिमाग की

धड़कनों पर,

थिरकने लगता है मन !



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