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shekhar kharadi

Children Stories

3  

shekhar kharadi

Children Stories

डाकिया

डाकिया

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दूर से आया, पास से देखा

साइकल चलााते हुए

हरफ़नमौला डाकिया

टिन..टिन..घंटी बजाते ,

चिट्ठियों का झोला लेकर 

कच्ची-पक्की सड़कों पर

गली, मुहल्ले, नुक्कड़ से गुजरा

स्नेह, उल्लास, दुःख से भरी

अंसख्य डाक कि गठरी लेकर ,

दूर दराज रिश्तों में घुलता रहा

हृदय की भावना खोलता रहा

खट्टी-मीठी बातें बोलता रहा

सुंदर सपनें नैनों में टटोलता रहा

इंतज़ार की राहें खत्म करता रहा ,

डाकिया डाक लाया, मन की बात लाया

खुशियों का पैगाम लाया, जिंदगी का रंग लाया!


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