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Praveen Gola

Others

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Praveen Gola

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दादा-दादी, नाना-नानी

दादा-दादी, नाना-नानी

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दादा-दादी, नाना-नानी,बचपन के ख़ुशियों की कहानी,

उनके प्यार और स्नेह से जगमगाती यह धरा,बच्चों का मन जिनके प्यार से कभी ना भरा।

घर में चाय की खुशबू सबसे पहले,मम्मी की गोद में सपनों की नींद हो जैसे ,

दादी के हाथों का आशीर्वाद सबसे मीठा,दादा की गोद में खेल के आसमान जीता।

दादा की कविता सुनकर हो जाती जीवंत हर बात,नाना के संग खेलते हर खेल हो जाता ख़ास ,

दादी की कहानियाँ सुनकर जीते हर पल ज़ीना,नानी के प्यार को पाकर मिलता हर ख़ुशी का नगीना।

दादा ऊँगली पकड़ विद्यालय ले जाते ,

नाना घोड़ा बन पीठ पर बैठाते ,दादी खाना बना हाथों से खिलाती ,

नानी थपकी दे प्यार से पीठ सहलाती।

दादा की चिढ़ाई, नाना की नाराजगी,बचपन के दिन यादगार बन जाते हैं आज भी ,

दादी की ममता, नानी की ममता,जीवन के पथ पर देतीं हैं समता।

दादा-दादी, नाना-नानी,बचपन के ख़ुशियों की कहानी।

उनके प्यार और स्नेह से जगमगाती यह धरा,

बच्चों का मन जिनके प्यार से कभी ना भरा।। 



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