चाँद सा टुकड़ा
चाँद सा टुकड़ा
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तू चाँद सा ऐसा टुकड़ा है,
मेरे ज़हन में बसा तेरा मुखड़ा है,
तुझमें बसी मेरी जान है,
तू मेरा गर्व तू मेरी शान है।।
तुझसे ही सारी मेरी ख़ुशी है,
हर ग़म को दूर करती तेरी ये हंसी है,
तेरी शैतानियो से परेशान हूँ मैं,
उन चंचल नादानी से हैरान हूँ मैं।।
तेरी ख़ुशी के लिए ये जान कुरबान है,
तू मेरी रूह तू मेरा ईमान है,
भगवान तेरे होंठों से ना करे ये हंसी कम,
तुझे हमेशा मिले ख़ुशी कोसों दूर रहे ग़म।।
