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Pritika Rawal

Others

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Pritika Rawal

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याद

याद

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आज फिर उसी आशियाने में बैठकर तुम्हारी याद आई, 

अच्छी या बुरी बहुत वक़्त गुज़रने के बाद आई, 

कुछ तो बात रही होगी उस प्यार में,

ढेरों नज़रअंदाज़ करने के बाद आज मेरे समक्ष आई,

वो क्या कहते थे तुम कि तू नहीं तो कुछ नहीं, 

वहीं बातें कान में आकर ख़ुद में एक कपकपी सी पाई, 

कितनी सच्चाई थी उन बातों में इस सोच में डूबकर दिन बीता,

काश़ वो सपना जो अच्छा है या बुरा कभी उसे दिल भूल पाता, 

नहीं चाहती थी उसे भूलना पर इस कशमकश भरी ज़िंदगी से दूर जाना चाहती हूँ,

भगवान की दी हुई इस ख़ूबसूरत ज़िंदगी को फिर से जीना चाहती हूँ!!!


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