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बिनु हरि भजे न मैल मिटेगा

बिनु हरि भजे न मैल मिटेगा

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बिनु हरि भजे न मैल मिटेगा

बिनु गुरु ज्ञान न तमस मिटेगा

 

जो मन भाव रहे सोई पाये

छल कीन्हे विश्वास मिटेगा  

 

हरि को हरि का सौंप रहेगा

सुख आयेगा दुःख ही मिटेगा

 

खुद को समर्पित करे जो हरि में

उसका नाम न जग से मिटेगा

 

बिनु कछु लोभ करे जो कर्मा

मिल माटी पर यश न मिलेगा

 

हरि शरणम् जो जाए ‘पवन’

वो प्रहलाद सा नहीं मिटेगा

 

 


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