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Nitu Mathur

Others

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Nitu Mathur

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भीगता मौसम

भीगता मौसम

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गुनगुनी चाह की सरगोशी लिए ..

कैसे आया बरसता भीगता मौसम

सलेटी परत तोड़े भिगोता ये आलम,

पत्तों पर पड़ी ओस, ठंडे पानी के रेले

किस ओर बह रहे ये झरते छत परनाले

ये मीनारों से दिखते टहलते बादल

परिंदों के परों से छनती बूंदे अविरल,

कहते हैं...

भीगी भोर दिल का मिज़ाज बदल देती है

गमगीन पलों को भी खुशनुमा बना देती है,

तो क्या मैं समझूं कि मैं भी आज बदली सी हूं?

हां..मैं भी अब इनसे वाकफियत करने लगी हूं

प्याले की गरमाहट से गुफ्तगू करने लगी हूं।


              


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