बचपन
बचपन
1 min
249
तन बचपन का हों ना सके
मन बचपन सा हो जाए
बच्चो जैसे खेले हम
बच्चो से हम सो जाए
जीवन का हर पल हो निराला
हर पल को हम जी जाएं
हस लें फिर हम पेट पकड़ कर
कोई चुटकुला हो जाए
देखें सपने सोते जागे
सपनो में हम खो जाए
आसमान में ढूंढे हाथी-घोड़े
हर पल वो बन मिट जाएं
एक दूसरे के घर को हम
बिन पूछे फिर चल जाए
बाप के कंधे पर फिर चढ़कर
मेला देखने हम जाए
मन बचपन सा हो जाए।।
