STORYMIRROR

Khyati Garg

Others

4  

Khyati Garg

Others

बचपन के दिन थे सुनहरे

बचपन के दिन थे सुनहरे

1 min
322

7 अरब लोग पर 14 अरब चेहरे,

 जब आए मुसीबत सर पर तेरे,

चारों ओर से तुझे है घेरे ,

एक-एक करके, सब मुँह फेरे,

 तेरे अपने ही है तेरी खुशियों के लुटेरे,

 पीछे से वार कर, धाव देते हैं गहरे,

 सच में बचपन के दिन ही थे सुनहरे।


आँखों में ले कर बहुत से अरमान,

धोखों से तो थे हम अनजान,

कौन सच्चा कौन बेईमान,

इन बातों से न था हमें कोई काम 

रात हो या दिन 24 घंटे था आराम। 


उन दिनों को मैं ढूँढती हूँ रोज,

पर नहीं मिलते, इस बात का है अफसोस,

जब न जाना हो स्कूल, तो बादलों से करते थे गुज़ारिश

 कि भीग जाए ये जमीन और हो जाए बारिश,

रोज मिले चॉकलेट बस इतनी सी थी ख्वाहिश।

 उस समय हम पर न थी कोई बंदिश,

पर अब आगे बढ़ने की करते है कोशिश,

और दूसरों को पीछे करने की करते है साज़िश,

बचपन के वो दिन आ जाए वापिस,

 बस इतनी सी करती हूँ सिफारिश।


आखिर इतने सालो बाद,

करती हूं उन दिनों को याद,

 ये यादें सदा रहेंगी साथ मेरे,

सच में बचपन के दिन ही थे सुनहरे ।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन