सोने की चिड़िया
सोने की चिड़िया
जिस पावन भूमि का उड़ाया अँग्रेज़ों ने उपहास,
भारतीयों के आत्म-सम्मान को हानि पहुँचाने का किया प्रयास,
जन्मे जहाँ महान ऋषि जैसे वाल्मिकी और वेद व्यास,
क्या जाने वो अंग्रेज भारत का स्वर्णिम इतिहास ?
आओ उस गौरवशाली अतीत की सुने कहानी,
खुद भारत माता की जुबानी-
थी मैं भी कभी सोने की चिड़िया,
पर अंग्रेजों ने परतंत्रता के पिंजरे में मुझे बंद कर दिया,
छिन मुझसे मेरा गौरव, मुझे घायल कर दिया,
थी मैं भी कभी सोने की चिड़िया।
शिवाजी, महाराणा प्रताप, चंद्रगुप्त जैसी मेरी संतान,
अपने साहस एवं वीर्य से बढ़ाया मेरा मान,
बढ़ाने अपनी मातृभूमि की शान,
वीरांगना लक्ष्मी बाई ने भी किया प्राणदान,
ऐसे ही नहीं कहते इस देश को महान,
यहाँ जन्मे प्रेम के प्रतीक सीता-राम।
चाणक्य, आर्यभट, ब्रहमगुप्त तो थे मेरे लिये वरदान,
समस्त संसार में फैलाया गणित का ज्ञान।
विश्वविद्यालय थे जैसे नालंदा और तक्षिला,
दिवाली में जगमगाता आसमान और होली पर हो जाता रंगीला।
बहती जहा भारती एवं ब्रह्मपुत्र जैसी नदिया,
इस पुनीत धरा को सींचे भागीरथी और रवितनया,
पर नालंदा - तक्षिला को बेरहमी से जला दिया,
बेड़ियों से जकड़, मुझे बंदी बना दिया,
थी मैं भी कभी सोने की चिड़िया।
राजपूत शेरनियाँ कर गई जौहर,
अपने शौर्य पर लगा गई मोहर।
खुशी-खुशी जलना स्वीकार किया,
पर कोई भी अंग अपना न इन्होंने छूने दिया,
इज्जत पर हाथ धर, मेरे सम्मान को चोटिल किया,
थी मैं भी कभी सोने की चिड़िया।
इन अंग्रेजों ने सभी मंदिरों को ध्वस्त कर दिया,
जहाँ जलाते थे लोग भक्ति व आस्था का दीया,
विध्वंस मचाते समय न एक बार भी चिंतन किया,
थी मैं भी कभी सोने की चिड़िया ।
ये सब सुनने में लगता कोई सपना डरावना,
अल्प होती जा रही है, देश भक्ति की भावना,
क्या फिर से सोने की चिड़िया बनने की है ना कोई संभावना ?
आज की पीढ़ी को भारत माता रही है पुकार-
उठो मेरे वीरों, मुझे है तुम्हारी दरकार,
भारत की आन-बान को तुम्हें बचाना है,
खोए हुए गौरव को तुम्हें लौटाना है,
ये भारत तो धन-धान्य का खजाना है,
इसके असली महत्व को तुमने नहीं पहचाना है।
फिर से ये उपवन महकेगा, खिलेगी ये बंद कलियाँ,
थी मैं भी कभी सोने की चिड़िया।
