STORYMIRROR

Nigar Yusuf

Others

2  

Nigar Yusuf

Others

बादलों के लिफ़ाफे़

बादलों के लिफ़ाफे़

1 min
191

आज बादलों के लिफ़ाफे खुल गए

और बारिशों की चिठ्ठियां हमने पढ़ी।

चहकते अल्फाजों की बूंदों से

हम ऐसे गीले हुए, के बह गए सब शिकवे, 

हम धूल गए।

कश्तियाँ आज पानी में उतरी हैं...

कागज़ों को जो को जो मोड़ा हमने

लो...दिलों को जोड़ा हमने,

पानी पे यूँ ही बहते रहें 

किनारों की नहीं ललक हमें।

बेफिक्री के दिन है ये मेरे

बिता लूं ख़ुशगवारियों के साथ,

लड़कपन के दिन है मेरे

जी लूँ शरारतों के साथ

के जवानी जब आएगी

ज़िम्मेदारियां साथ लाएगी।

मुझे मेरे दोस्तों से दूर लेके जाएगी।



विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन