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Bhawna Kukreti Pandey

Children Stories

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Bhawna Kukreti Pandey

Children Stories

और ज़रा मैं खेलूँ

और ज़रा मैं खेलूँ

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घर पर बैठी बिट्टी सोचे

थोड़ा और अभी मैं खेलूँ।

घर मे नहीं खेलता कोई

अब किसके संग मैं खेलूँ।


पूछूं दादा क्या करते हो,

रोज दुपहरी क्यूं सोते हो?

डाँट पड़े अगर इस पर तो

क्या दादी के संग खेलूँ ?


पूछूं पापा क्या करते हो,

रोज दफ्तर क्यूँ जाते हो?

झाड़ पड़े अगर इस पर तो

क्या मम्मी के संग खेलूँ?


पूछूं भैया क्या करते हो,

रोज पढ़ाई क्यूँ करते हो?

मार पड़े अगर इस पर तो

क्या दीदी के संग खेलूँ?


बजी स्कूल की घंटी भैया

अब बस्ते को मैं ले लूँ।

अच्छे मेरे दोस्त वहां पर

संग पढ़ूं और खेलूँ ।


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