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Dheeraj Kasturi

Others


5.0  

Dheeraj Kasturi

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अर्ज़ करता हूँ दिल के ज़ुबाँ से

अर्ज़ करता हूँ दिल के ज़ुबाँ से

1 min 75 1 min 75

सोच में रहकर कभी मेरे हाथ ने

स्याही फैलाई कागज़ पे 

लिखने लगे एक नई शायरी

अनोखे किस्सों की एक फनकारी


अर्ज़ करता हूँ मेरे दिल के ज़ुबां से

अल्फ़ाज़ मैं भरता हूँ तारीफ़ ए काबिल के

कुछ अलग सा हैं ये शेर मेरा

रुहानी और अलहदा इस संसार से


ज़हर के प्याले कभी पिये नहीं जाते

मायूसी में फैसले कभी लिए नहीं जाते

ग़म के ख़याल कभी जिये नहीं जाते

मदहोशी में सवाल कभी किये नहीं जाते



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