आज की स्तिथि लोकतंत्र में
आज की स्तिथि लोकतंत्र में
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कब तक सच पे वार करोगे
सारा गुलशन खार करोगे
नाविक तो तुम बन बैठे हो
कैसे नैया पार करोगे
उम्मीदों में जो बैठे हैं
क्या उनको बेकार करोगे
जनता से जो किये थे वादे
क्या उनको साकार करोगे
बेच रहे हो सभी विरासत
क्या सब को लाचार करोगे
छोड़ो नफरत के खंजर अब
आओ नैना चार करोगे
इतना हमें सताओगे तो
तुम भी हाहाकार करोगे।
