I'm चेतना प्रकाश and I love to read StoryMirror contents.
प्रेम के दो शब्द बोल दो, जीवन है चार दिन के , नफरत करना छोड़ दो । प्रेम के दो शब्द बोल दो, जीवन है चार दिन के , नफरत करना छोड़ दो ।
बारिश का मौसम , लगता था सुहाना। भीगें -भीगें कोमल पत्तों पर, बारिश का मौसम , लगता था सुहाना। भीगें -भीगें कोमल पत्तों पर,
लक्ष्मी की सूरत ममता की मूरत लाखों में एक हमार भौजी। लक्ष्मी की सूरत ममता की मूरत लाखों में एक हमार भौजी।
अमवा के डलिया पे बोले जब कोयलिया, जियरा हमार सुलग जा ला सजनवा हो। अमवा के डलिया पे बोले जब कोयलिया, जियरा हमार सुलग जा ला सजनवा हो।
उन मुश्किलों का अडिग होकर मैं सामना करूंँ, चेतना प्रकाश की संगिनी बन कदम से कदम मिलाक उन मुश्किलों का अडिग होकर मैं सामना करूंँ, चेतना प्रकाश की संगिनी बन कदम से ...
जितना मैंने पहचाना माँ ममता की मूरत होती है। जितना मैंने पहचाना माँ ममता की मूरत होती है।
कोई हवा छू न सके अभिमान को, चला परिंदा घर की ओर। कोई हवा छू न सके अभिमान को, चला परिंदा घर की ओर।
चेतना प्रकाश चितेरी की कहानी के सभी किरदार स्वावलंबी हैं। चेतना प्रकाश चितेरी की कहानी के सभी किरदार स्वावलंबी हैं।
सनातन संस्कृति हमारी धरोहर पीढ़ी दर पीढ़ी रखे ज्ञान सनातन संस्कृति हमारी धरोहर पीढ़ी दर पीढ़ी रखे ज्ञान