Anupreeta (Anu) Chatterjee is a published feminist poet from Korba, Chhattisgarh. Currently, she is pursuing her Ph.D. in Women's Studies from Indira Gandhi National Open University.
इक मुर्ख करे, इक ही मूर्खता, और बहाने दे हजार. काउ बिछड़न मनोरंजक लागे रूप नाम के पार. इक मुर्ख करे, इक ही मूर्खता, और बहाने दे हजार. काउ बिछड़न मनोरंजक लागे रूप नाम क...
जिसे मुक्तक की खोज हो, उसे पिंजड़ा नहीं, आसमान चाहिए, उड़ने के लिए, खुद को सहेजने के लिए, कुछ नीले नी... जिसे मुक्तक की खोज हो, उसे पिंजड़ा नहीं, आसमान चाहिए, उड़ने के लिए, खुद को सहेजने...
कोई देश बने बंधू , कोई बने दुश्मन अनाड़ी कहीं मिले हाथ तो कहीं हुई बमबारी। पिसा कौन सत्ता के आड़ में ... कोई देश बने बंधू , कोई बने दुश्मन अनाड़ी कहीं मिले हाथ तो कहीं हुई बमबारी। पिसा ...
क्या कोयल, क्या कौवा शहर के शोर ने सबको शांत कर दिया। केवल बड़ी-बड़ी इमारतें आसमान से बात करती हैं। क्या कोयल, क्या कौवा शहर के शोर ने सबको शांत कर दिया। केवल बड़ी-बड़ी इमारतें आसमान...
क़ैद कैसी होती है आत्मा एक शरीर में ? शायद अनुचित ये सवाल है और चेतना पर न जाने किसका अधिकार है ? क़ैद कैसी होती है आत्मा एक शरीर में ? शायद अनुचित ये सवाल है और चेतना पर न जाने क...
कहीं भेंट, कहीं किस्सेदारी कहीं रेट, कहीं हिस्सेदारी ज़िन्दगी पटरी से उतरी हुई और साँसें हैं भारी। कहीं भेंट, कहीं किस्सेदारी कहीं रेट, कहीं हिस्सेदारी ज़िन्दगी पटरी से उतरी हुई और...
प्रेम कोई भोग नहीं बस साझेदारी है, एक समझदारी है, बिल्कुल शबरी की तरह प्रेम कोई भोग नहीं बस साझेदारी है, एक समझदारी है, बिल्कुल शबरी की तरह
ये खुद से विरह की निशानी मुझे धुंधली सी दिखाई क्यों दी ? ये खुद से विरह की निशानी मुझे धुंधली सी दिखाई क्यों दी ?
मुआवजा मिला क्या यूँ जाने के लिए, कि तेरे सामने किसी और के हो जाएँ। मुआवजा मिला क्या यूँ जाने के लिए, कि तेरे सामने किसी और के हो जाएँ।
थोड़ा सुकून मिलता था, लगता था मानो कोई उस गाँव के चबूतरे पर वापस हमारी कहानी सुनने थोड़ा सुकून मिलता था, लगता था मानो कोई उस गाँव के चबूतरे पर वापस हमार...