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सौंदर्य के बोध में मुझ में अपना सावन उतार दो सौंदर्य के बोध में मुझ में अपना सावन उतार दो
मेरे भावों के नूपुर भीतर छिपे गहराई में पैरों के आहट पर मौन शब्दों में झन झन मेरे भावों के नूपुर भीतर छिपे गहराई में पैरों के आहट पर मौन शब्दों में झन झन
ज़िन्दगी की तपती दोपहर में सहेजा हुआ मौन ! ज़िन्दगी की तपती दोपहर में सहेजा हुआ मौन !
जी रहा हूँ यूं ही है इन दिनों किश्तों में ज़िंदगी अपनी। जी रहा हूँ यूं ही है इन दिनों किश्तों में ज़िंदगी अपनी।
पास आने में साये भी कतराने लगे हैं फूल भी दूरियां बढ़ाने लगे हैं चाँद भी दूर हो गया घने बादलो... पास आने में साये भी कतराने लगे हैं फूल भी दूरियां बढ़ाने लगे हैं चाँद भी ...
जब पास होता है सिर्फ एक शून्य....। जब पास होता है सिर्फ एक शून्य....।