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आज़ादी का दीप
आज़ादी का दीप
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© Pinkal Jain

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14 अगस्त की शाम लिखा मैंने

क्या आज़ादी का दीप जलेगा कभी?

जो जले थे कभी

वो भी बुझ गए

अगर सरकारें करती रहीं मक्कारी

तो न सुधरेगी जनता की बदहाली

ऐसे मे आज़ादी का दीप जलेगा कभी

कब तक लुटेंगी बेटी की आबरू?

क्या न मिलेंगी बेटी को आज़ादी?

ऐसे में आज़ादी का दीप जलेगा कभी

कब तक रहेंगी अब बेरोज़गारी

क्या अब न मिटेंगी गरीबी कभी

ऐसे मे आज़ादी का दीप जलेगा कभी.

आज़ादी का दीप

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