Quotes New

Audio

Forum

Read

Contests

Language


Write

Sign in
Wohoo!,
Dear user,
यथार्थ में संशोधन
यथार्थ में संशोधन
★★★★★

© Naayika Naayika

Others

1 Minutes   13.3K    5


Content Ranking

यथार्थ में संशोधन का प्रयास

शक्य है जब नदी को लगे प्यास

 

सारी व्याकुलता बन जाए एक खोज

और ह्रदय के गहरे से उठे कोई मौज

 

जब रीढ़ की हड्डी भी कर दे झुकने से मनाही

और कलम भी छोड़ दे पीना स्याही

 

जब शब्दों से अर्थ विलीन हो जाए

और मौन समाधि में लीन हो जाए

 

सब कुछ रूपांतरित हो जाए नदी की प्यास में

और दौड़ पड़े सागर की तलाश में

 

भव सागर और ज्ञान सागर एक हो जाए

और प्यासी नदिया उसमें डूब जाए

 

 तब विचारना क्या कोई संशोधन अब भी बाकी है

इस प्रकृति में क्या तू सच में एकाकी है

 

क्या अब भी कोई यथार्थ दिखाई देता है

क्या अब भी कोई और परमात्मा रचयिता है

 

यदि है तो समझना नदी अब भी प्यासी है

यथार्थ में संशोधन अब भी बाकी है...

यथार्थ संशोधन

Rate the content


Originality
Flow
Language
Cover design

Comments

Post

Some text some message..