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आऊँगा जरुर
आऊँगा जरुर
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© Raman Sharma

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आज बहुत दूर हूँ  ,
पर अकेला हूँ ,
ज़िंदगी से हैरान हूँ ,
क्या करूँ क्या करूँ ।
पा तो लिया सब कुछ ,
पर उलझा हुआ हूँ ,
थक गया करके काम ,
अब छुट्टियाँ चाहता हूँ ,
बहुत बीत गऐ दिन ,
अपनों से मिलना चाहता हूँ ।
आज एहसास है कुछ ,
अपनों से जो दूर हूँ ,
वो भी ज़माना था ,
माँ रोटी खिलाती थी ,

एक दिन आऊँगा मैं, ज़रुर ।


बहुत दूर आ गया हूँ  ,
अकेला हूँ ,
ज़िंदगी से हैरान हूँ ,
क्या करूँ क्या करूँ ?
पा तो लिया सब कुछ ,
फिर भी उलझन में हूँ ,
थक गया करके काम ,
चाहता हूँ कुछ आराम ,
दिन बहुत बीत गऐ,
अपनों से मिले हुऐ   ।
एहसास होता है कुछ कुछ ,
अपनो से जो दूर हूँ जब I
वो भी ज़माना था ,
माँ रोटियाँ खिलाती थी ,
पापा पूरे करते थे ख़र्चे I
आज अपनों से ही दूर हूँ ।
क्या करूँ क्या करूँ ?
आना तो चाहता हूँ ,
पर छुट्टियाँ तो मिलें ,
इंतेज़ार करता रहता हूँ ,

कब वह दिन आऐ I
यार करते हैं फोन मुझे  ,
आओ कभी, आओ अभी!
कामों में व्यस्त, सोचता  हूँ ,
आऊँगा मैं ज़रुर !
 

पापा ख़र्च देता था ,
आज अपनों से ही दूर हूँ ।
क्या करूँ क्या करूँ ,
आना तो चाहता हूँ ,
छुट्टियाँ कब मिलें ,
इंतेज़ार करता रहता हूँ ।
मेरे यार करते हैं फोन ,
आओ कभी आओ कभी ,
बस कामों में व्यस्त हूँ ,
लेकिन आऊँगा मैं ज़रुर ,
आऊँगा मैं ज़रुर ।

 

raman sharma

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