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एहसास
एहसास
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© Raman Sharma

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उलझे हुऐ थे पहले से ही हम
कुछ उन्होंने उलझाऐ रखा !
क्या बीतेगी हमारे जज़्बातों पर
जानते हुऐ अनजान बताये रखा !
बढ़े थे कदम दोस्ती की तरफ़
ख़ुद को गुमनाम बताये रखा !
वफ़ाऐं असीमित हैं मन में 
हर अल्फ़ाज में बताऐ रखा !
कहीं आँखें सूखी ही ना रह जाऐं

आँसुओं को एकत्रित किऐ रखा !
काश मिल जाऐ दोस्ती उनकी 
ख़ुदा से फरियाद किऐ रखा !
समझ लेगी मन की बात को 
इंतेज़ार में ख़ुद को बैठाये रखा !
मिले थे वो वफ़ा बनकर हमें 
ख़्यालों ने रातों में जगाऐ रखा !
साथ के सिवा और आस नहीं
ज़रुरत का ध्वज लहराऐ रखा !

raman sharma

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