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सावराया हवे आता तसे वास्तव काय मजला जगायला नकोच निवारा कविता गरिबी काळा डोह अश्रू जिंदगानी आभास लक्षात नोंद दूर विचारले हवे हवेसे वाटते

Marathi हवे Poems