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हवे हवेसे जगायला आभास सारे विश्रांती वाटते मजला तसे जग दूर माणुसकी काय सावराया हवे आता विचारले गरिबी जिंदगानी नोंद वास्तव कविता लक्षात

Marathi हवे Poems