सुपर पावर
सुपर पावर
दिन प्रतिदिन ऋषभ के नंबर कम होते जा रहे थे। पहले तो वह हर समय टेलीविजन ही देखता रहता था। जब पेरेंट्स टीचर मीटिंग में पापा को मैडम ने परीक्षा में उसके गिरते नंबरों के बारे में बताया तो उसके टेलीविजन देखने का टाइम नियंत्रित कर लिया गया।
कोराना के समय में जब सब कुछ ऑनलाइन हो गया तो और ऋषभ को भी पापा ने एक स्मार्टफोन टैब दिलवा दिया। अब उसकी पढ़ाई भी फोन से ही होती थी। ऑनलाइन क्लासेज भी फोन से ही उसे अटेंड करनी होती थी। बस यहीं से शुरू हो गया ऋषभ का कार्टून देखने का सफर। वह हर समय शिनचेन नोबिता, सुपरमैन और भी जाने कौन-कौन सी कार्टून फिल्में हर वक्त देखता रहता था। सुपर-मैन से तो उसे इतना प्यार हो गया था की अब वह उसे हर समय अपने पास बैठे हुए भी महसूस कर पाता था।
उसका ध्यान फिर से पढ़ाई से हट रहा था और कार्टून की तरफ जा रहा था लेकिन मम्मी टैब तो छीन नहीं सकती थी क्योंकि पढ़ाई भी तो उससे ही होनी थी। कान में स्पीकर लगाने के कारण आधी बार तो मम्मी को यह भी नहीं पता चलता था कि वह पढ़ रहा है या कि कार्टून देख रहा है।
अब क्योंकि उसे सारा दिन घर में ही रहना था और अब उसके पास समय भी बहुत था इसलिए उसने अब अपने ऊपर रखे हुए स्केट्स भी निकाले और स्केट्स पहन के ही उसकी भी प्रैक्टिस करता था।
कहीं भी चलते हुए उसे ऐसा महसूस होता था जैसे कि सुपर-मैन उसके साथ चल रहा है। उसने स्केट से अच्छी प्रैक्टिस कर ली थी। क्योंकि मम्मी पापा जल्दी उठ जाते थे तो वह भी जल्दी उठकर नीचे जाकर स्केट्स पहनकर इधर-उधर घूमता रहता था।
कई बार तो उसे ऐसा लगता था कि वह सुपर मैन के साथ में रेस लगा रहा है और उसे पता भी नहीं चलता था वह छोटी मोटी ऊंचाइयों को भी अपने स्केट्स से ही पार कर जाता था।
उसको पैरों में स्केट्स पहनकर इतना अच्छा चलते हुए देखकर और लड़के भी हैरान हो जाते थे। अब धीरे-धीरे और भी बच्चे उठकर पैरों में स्केट्स पहनकर सवेरे सैर करने आने लगे।
चलते चलते उसने सड़क पर आने वाली काफी बाधाओं को बिना परेशानी के पार कर लिया तो बाकी लड़के भी हैरान होकर उसे देखने लगे। ऋषभ ने सब लड़कों को बताया कि मेरे साथ हमेशा सुपर मैन रहता है वही मेरी सहायता करता है। वह अपने दोस्तों के साथ डींगे मारते हुए सुपर-मैन और अपने बहुत से झूठे सच्चे किस्से उन्हें सुनाता रहता था। अब उसे ही नहीं अपितु और लड़कों को भी विश्वास हो गया था कि ऋषभ की सहायता सुपर मैन करता है।
दोस्तों से प्रोत्साहन पाकर अब वह स्केट्स से करतब भी दिखाता था। मम्मी पापा अभी भी उससे पढ़ने के लिए कहते थे लेकिन वह भी उनके आते ही अपनी पढ़ाई खोल कर बैठ जाता था तो वह भी चुप हो जाते थे।
ऋषभ का फ्लैट 19 वीं मंजिल पर था और उसके ऊपर छत थी। छत पर मम्मी ने छोटा सा गार्डन बनाया हुआ था। छत पर ही उन्होंने तोरी की बेल और बहुत से फूलों की बेल लगाई हुई थी।
ऋषभ ने मम्मी को कहा कि वह छत पर जाकर पढ़ना चाहता है। मम्मी के हां कहने पर वह अपने घर की छत पर चला गया और वहां पर स्केट पहनकर और दूसरी छत पर खड़े हुए अपने दोस्तों को करतब दिखा रहा था । हालांकि उसके दोस्तों को भी उसके कई करतब बहुत खतरनाक लग रहे थे और वह ऋषभ को ऐसा करने से मना कर रहे थे लेकिन ऋषभ ने कहा कि क्या तुम्हें नहीं पता मेरी सहायता हमेशा सुपर-मैन करता है इसलिए अगर मुझे कुछ भी होगा तो वह अपने आप मुझे पकड़ लेगा।
बहुत जोश में अब के जब वह अपने स्केट्स पहन के चला तो उसका पैर फिसला और वह छत से नीचे की ओर गिर पड़ा। उसके हाथ में बालकनी की रेलिंग आ गई थी जिसको पकड़कर वह जोर-जोर से सुपर-मैन सुपर-मैन चिल्ला रहा था।
अचानक जोर की आवाज सुनकर जब ऋषभ के मम्मी पापा बाहर आए तो वह भी यह देख कर घबरा गए। भविष्य की कल्पना से ही सब सिहर उठे। चारों तरफ शोर बढ़ता ही जा रहा था तभी ऋषभ ने देखा की एक हाथ उसको पकड़ने के लिए बालकनी की तरफ बड़ा और उस साथ ने लटके हुए ऋषभ को पकड़ कर ऊपर खींच लिया।
डर के मारे ऋषभ ने अपनी आंखें बंद कर रखी थी। अब जब उसने आंखें खोली तो खुद को पापा के सीने से लगा पाया। मम्मी भी रोते-रोते चिल्ला रही थी अगर तुझे कुछ हो जाता तो मैं क्या करती?
पापा ने उसे समझाते हुए कहा बेटा कार्टून वास्तविकता नहीं होती। यह सिर्फ मनोरंजन के लिए ही होते हैं। अगर आज तुम्हें कुछ हो जाता तो? तुम्हें बचाने के चक्कर में भागने के कारण मेरे पैर में भी मोच आ गई।
ऋषभ बहुत शर्मिंदा हुआ और अपने पापा से गले लग कर बोला नहीं पापा सुपरमैन होता है और सुपरमैन के पास सुपर पावर होती है और वह पावर होते हैं मेरे पापा।!! जो कि मुझे हर मुसीबत से बचाते हैं। जो कि मुझे सब कुछ दिलवाते हैं और मुझे बहुत प्यार करते हैं। मैं अब हमेशा आपका कहना मानूंगा।
पाठकगण आपकी जानकारी के लिए बता दूं कि उस के बाद ऋषभ ने पढ़ाई में अपना पूरा ध्यान लगाया और आठवीं में अपनी क्लास में फर्स्ट भी आया।
