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Dr. Akansha Rupa chachra

Children Stories

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Dr. Akansha Rupa chachra

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लालच का परिणाम

लालच का परिणाम

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बहुत पुरानी बात है एक गाव में एक बहुत बड़ा सेठ रहता था। वह एक दिन कहीं जा रहा था की अचानक उसका बटुआ गली में खो गया तो उसने पुरे गाव में घोषणा करवा दी की उसके बटुए में पांच हजार रुपे थे और जो उसे लोटा देगा, वह उसे पांच सो रुपे के इनाम में देगा।


उसी दिन संध्या के समय एक बुढिया को उस सेठ का बटुआ मिल गया और वह उसे लेकर फोरन सेठ के पास आई। लेकिन सेठ को लालच आ गया और उसने पूरा का पूरा पैसा खुद रखने की ठान ली। इसलिए उसने बुढिया से कहा की उसके बटुए में पांच हजार पांच सो रुपे थे और उसने पांच सो रूपये पहले ही रख लिये है। पर बुढिया को यह बात बिलकुल अच्छी नहीं लगी और वो सीधा राजा के पास चली गई। उस बुढिया ने राजा को सारी बात बताई और बोली, “हे महाराज अगर मुझे पैसे लेने ही होते तो में सारे पैसे रख लेती न की पांच सो रुपे रख कर बाकि वापिस करती।


बुढिया की पूरी बात सुन कर राजा को शक हुआ की सेठ बुढिया को दोखा दे रहा है। इसलिए राजा ने सेठ को एक सबक सिखाने के लिए सेठ से कहा, “में समझता हु की ये बटुआ तुम्हारा नहीं है क्योकि इसमें सिर्फ पांच हजार रुपे है ने की पांच हजार पांच सो। और हमारे पास पांच हजार खोने की कोई शिकायत नहीं है इसलिए हम ये फेसला लेते है की ये पांच हजार वाला बटुआ इस बुढिया को दे देते है। हम बुढिया की ईमानदारी से बहुत खुश है। इसलिए इन्हें बतोर इनाम हम इन्हें पांच हजार रूपये अपनी तरफ से भी देते है।” बस फिर क्या था या सुन कर सेठ के तो होश ही उड़ गए और बुढिया राजा को उसके न्याय के लिए आशीर्वाद देकर ख़ुशी ख़ुशी वहां से चली गई।


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