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Akanksha Gupta (Vedantika)

Others

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Akanksha Gupta (Vedantika)

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क्योंकि आज होली है

क्योंकि आज होली है

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मैं बहुत जोर जोर से रो रही थी। सब लोग मेरे पास इकट्ठा हुए।


किसी ने पूछा-“क्या हुआ?”


मैने कहा- “मेरी मम्मी खो गई।”


“कहाँ खो गई? यहीं कहीं होगी।”


इतनी देर में मम्मी आ गई। उनको देखकर मैं और जोर-जोर से रोने लगी।


“आपका चेहरा काला कैसे हो गया? अब ठीक कैसे होगा?”

उन्होंने अपने चेहरे पर पानी डाला और हंसने लगी।


“यह तो रंग है। मेरे चेहरे को कुछ नहीं हुआ। आज तो सब लोग एक दूसरे को रंग लगाते है क्योंकि आज होली है। लो तुम भी मुझे रंग लगाओ।”


मैं वहाँ से अंदर भाग गई।



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