STORYMIRROR

Sarvesh Saxena

Others

1  

Sarvesh Saxena

Others

क्या पता

क्या पता

1 min
495

आज फिर रात सपने में उसको देखा

वह हमेशा की तरह मुस्कुराकर यही कह रही थी

तुम बहुत शर्माते हो ,तुम बहुत शर्माते हो,

और मैं बस उसे देखता रहा और कुछ बोल भी ना पाया,

क्या पता था कि फिर कभी उसे देख भी ना पाऊंगा,

क्या पता था कि फिर कभी उससे कुछ बोल भी ना पाऊंगा।


Rate this content
Log in