किसान की अमूल्य घड़ी
किसान की अमूल्य घड़ी
एक किसान अपने खेत के [पास स्थित अनाज की कोठी में काम कर रहा था! काम के दौरान उसकी घड़ी खो गई! घड़ी उसके पिता द्वारा उपहार में दी गई थी! उससे उसका भावनात्मक लगाव था! उसने वह घड़ी ढूंढने की बहुत कोशिश की. कोठी का हर कोना छान मारा! लेकिन घड़ी नहीं मिली। हताश होकर वह कोठी से बाहर आ गया! वहाँ उसने देखा कि कुछ बच्चे खेल रहे है! उनसे बच्चों को पास बुलाकर उन्हें अपने पिता की घड़ी खोजने का काम सौंपा! घड़ी ढूंढ निकालने वाले को ईनाम देने की घोषणा भी की! ईनाम के लालच में बच्चे तुरंत मान गए. कोठी के अंदर जाकर बच्चे घड़ी की खोज में लग गए!
इदर-उदर, यहाँ-वहाँ, हर जगह खोजने पर भी घड़ी नहीं मिल पाई. बच्चे थक गए और उन्होंने हार मान ली! किसान ने अब घड़ी मिलने की आस खो दी! बच्चों के जाने के बाद वह कोठी के बाहर उदास बैठ गया!
तभी एक बच्चा वापस आया और किसान से बोला कि वह एक बार फिर से घड़ी ढूंढ़ने की कोशिश करना चाहता था! किसान ने हामी भर दी! बच्चा कोठी के भीतर गया और कुछ ही देर में बहार आ गया! उसके हाथ में किसान की घड़ी थी!
जब किसान ने वह घड़ी देखी, तो बहुत ख़ुश हुआ! उसे आश्चर्य हुआ की जिस घड़ी को ढूंढ़ने में सब नाकामयाब रहे, उसे उस बच्चे ने बताया कि कोठी के भीतर जाकर वह चुपचाप एक जगह खड़ा हो गया और सुनने लगा! शांति में उसे घड़ी की टिक-टिक की आवाज़ की दिशा में खोजने पर उसे वह घड़ी मिल गई! किसान ने बच्चे को शाबासी दी और ईनाम देकर विदा किया!
सीक: शांति मन को एकाग्र कर जीवन को सही दिशा देती है! इसलिए रोज कुछ पल आत्म-चिंतन के लिए निकाले! रोज कुछ पल मौन में बिताएं, ताकि दुनिया की भीड़ में फंसने के बजाय आप अपने दिल की आवाज सुन सकें और बाद में पछताना न पड़े!
