भिखारी का खजाना
भिखारी का खजाना
एक छोटे से गांव में, सड़क के किनारे एक भिखारी रहता था! उसकी झोपड़ी टूटी-फूटी थी, खपरैल से ढकी हुई! वह दिन-रात उसी जगह बैठकर भीख मांगता! लोग उसे देकते, कुछ अनदेखा कर निकल जाते! उसकी जिंदगी बस यही थी - हाथ फैलाना, पैसे मांगना और किसी तरह दिन काटना! वह हमेशा पुराने, मैले कपड़ों में दिखता! उसका चेहरा थका-थका सा था, लेकिन आंखों में एक अजीब सी चमक थी, जैसे वह कुछ छिपा रहा हो!
एक दिन उस गांव से एक राजा का काफिला गुजरा! राजा की नजर उस भिखारी की झोपड़ी पर पड़ी! वह एक पल के लिए रुखा! उसने सोचा, "यह आदमी कितना गरीब है, कितनी दयनीय जिंदगी जी रहा है!" लेकिन फिर राजा को ख्याल आया, "मैं भी तो जीवन भर एक ख्वाब आया, "मैं भी तो जीवन भर एक ख्वाब के पीछे भागता रहा! मैं सम्राट बनना चाहता था, और अब सम्राट हूँ, फिर भी मन में शांति नहीं!"
राजा को लगा कि वह भी एक तरह से भिखारी ही है, बस उसका भिखारीपन दुनिया से छिपा हुआ है! वह धन, वैभव और सत्ता के लिए भागत रहा, लेकिन क्या वह सचमुच सुखी है?
राजा सोच में डूब गया, लेकिन उसका काफिला आगे बढ़ गया! भिखारी की जिंदगी यूँ ही चलती रही! वह हर दिन उसी जगह बैठता, हाथ फैलाता, और लोग उसे पैसे, रोटी या कुछ और दे देते! गांव वाले उसे जानते थे! कोई उसे दया का पात्र समझता, तो कोई उसे आलसी कहता! लेकिन भिखारी को इन बातों से कोई फर्क नहीं पड़ता था!
वह बस अपनी जगह पर बैठा रहता, जैसे उसे किसी चीज की चाह ही न हो! वक्त बीतता गया! भिखारी बूढ़ा होकर एक दिन मर गया! गांव वालों ने उसकी जर्जर झोपड़ ढहने का फैसला किया गया! लोगों ने सोचा! उन्होंने झोपड़ी तोड़ दी और उसका मलबा फेंक दिया!
कुछ लोगों को ख्याल आया कि जमीन को भी साफ करना चाहिए! उन्होंने मिट्टी खोदनी शुरू की, गंदी मिट्टी हटाई और नई मिट्टी डालने की तैयारी की! लेकिन जैसे ही उन्होंने मिट्टी खोदी, गांव में हड़कंप मच गया!
