ख़ुमार
ख़ुमार
सुभाष सुबह से गुस्से में घूम रहा था। किसी को कुछ समझ नहीं आ रहा था कि उसे हुआ क्या है।
"क्या हुआ सुभाष? सुबह से मुँह फूला कर क्यो घूम रहा है?"
"कुछ नहीं माँ। मुझे परेशान मत करो।"
"लेकिन हुआ क्या है जो तू आग बना हुआ है?"
"आज क्रिकेट मैच है और बिजली गुल हो गई।"
"तो क्या हुआ? आ जायेगी थोड़ी देर में।"
"तब तक तो इंडिया की बैटिंग भी निकल जायेगी और सारा मज़ा चला जायेगा।"
"हे भगवान! यह लड़का भी ना क्रिकेट के पीछे पगलाया पड़ा है।"
"अम्मा तुम कुछ नहीं जानती। इस पूरे राष्ट्र में क्रिकेट का मुझसे बड़ा प्रशंसक कोई और नहीं हुआ होगा हाँ।"
"कभी पढ़ाई के पीछे भी थोड़ा पागल हो जाया कर तो मेरे भाग खुल जाए।"
"अम्मा क्रिकेट में कितना मज़ा आता है किसी दिन देखो तो सही। चौके,छक्के, बॉलिंग, फील्डिंग। जब अपना इंडिया जीतता है तो कितना अच्छा लगता है।"
"लेकिन बेटा, जब बिजली ही नहीं है तो यह मैच-वैच का चक्कर छोड़ कर पढ़ाई कर ले।आगे वही काम आएगी।
"अरे अम्मा!अच्छा हुआ कि तुमने याद दिला दिया। मैं अभी बिजली घर होकर आता हूँ। जाने कब आएगी?
सुभाष बिजली घर जाने के लिए जैसे ही मुड़ा वैसे ही बिजली आ गई। बिजली के आते ही सुभाष के चेहरे पर ऐसी रौनक लौट आई
जैसे प्यासे को पानी।
अब सुभाष टीवी चैनल खोलकर यही प्रार्थना कर रहा था कि इस बार सरकार क्रिकेट मैच के दिन को विद्युत दिवस के रूप मनाया जाये और इस दिन कभी बिजली न भागे।
वैसे दोस्तों अच्छा ही होगा न क्योंकि अपने देश में हर दिन कोई न कोई क्रिकेट मैच चलता ही रहता है। इसी बहाने से देश के पिछड़े इलाकों में भी बिजली पहुँचने की सम्भावना बढ़ जाएगी।
