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सब तो अपने...

सब तो अपने चाहने वालों में खो गए, मैं गज़ल सुनाकर यूँ ही तनहा खड़ा रहा ।। --- ✍ अमितोष उपाध्याय "अमित"

By Amitosh Upadhyay "amit"
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