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रोज चाँद को...

रोज चाँद को खूबसूरत लिखता था आज उसके सामने वो भी फीका नज़र आया फ़लक, जमीं कुछ नहीं माँगता अब मैं उस ख़ुदा से उसकी निगाहों में जन्मों का साथ जो नज़र आया

By Rishabh Katiyar
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