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नया पुराना साल पिंजरबंद उत्सव भारत भूमि बिता हुआ साल दर साल उत्साह चाहतेहोजिंदगीकोसमझनातोपीछेदेखो गया गुज़रा उमंग आज कल आज मलाल सच आना जाना बसंत हम बीतेदिनयादें ना आया ख़ुशी करनापड़ताहैसबकोहीश्रम।देताहैपरमात्मासिर्फलकीरे