STORYMIRROR

कितना...

“ कितना बेगैरत है ये ज़माना नहीं चाहता कभी सुनना फ़साना, जख्मी दिल लेकर लिखा स्याही से कल रात, पर अब नहीं है इच्छा, इसे जमाने को सुनना। ”

By Rakshita Haripushpa
 272