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जितनी बार...

जितनी बार कोशिस की मैने, क़र्ज़ चुकाना उसका, पर हर-बार माँ का क़र्ज़, बढ़ता ही गया मुझ पे...!! .......इंदर भोले नाथ

By इंदर भोले नाथ
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