इंदर भोले नाथ
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आधुनिक हिंदी साहित्य से परिचय और उसकी प्रवृत्तियों की पहचान की एक विनम्र कोशिश : भारत http://merealfaazinder.blogspot.com

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शूकर है कि मुझे तुम्हारी तरह मीठा बोलने का हुनर नहीं है हां मैं अपनी जुबान पर कड़वाहट रखता हूं लेकिन दिल में नहीं © इंदर भोले नाथ बागी बलिया उत्तर प्रदेश

दश्त मे हैं तो निशानात बाकी है, वरना शहरों मे आजकल दरख़्त महफूज़ कहाँ हैं - इंदर भोले नाथ

जिसे सावरने की खातिर, मीटा दी सारी ख्वाहिशो को...! आज उसी घर से वो "शख्स", बे-दखल कर दिया गया...!! .......इंदर भोले नाथ

कुछ यूँ सीमटे हम तेरी यादों के साये में...! अब तो हमे खुद की भी सुध ना रही....!! .......इंदर भोले नाथ

बैठें इंतेज़ार मे, अब ये इरादा कर के "ऐ-ज़िंदगी", होंगे रु-ब-रु तभी तुझसे से ... जब दीदार-ए-यार मयस्सर हो....!! .......इंदर भोले नाथ

जितनी बार कोशिस की मैने, क़र्ज़ चुकाना उसका, पर हर-बार माँ का क़र्ज़, बढ़ता ही गया मुझ पे...!! .......इंदर भोले नाथ

तुम्हे पाने की ज़िद्द अपनी...! मुकम्मल होगी नही "इंदर"....!! बस दीदार ही तेरा मयस्सर हो....! इतना काफ़ी है जीने के लिए....!! .....इंदर भोले नाथ

तेरे साये से लिपट के, रोते रहें बड़ी देर तक...! आज नींद बड़ी गहरी आई, सोते रहें बड़ी देर तक...!! .....इंदर भोले नाथ

हमदर्द कितना बना गया, उनके आँसू का इक कतरा...! मैं आँसुओं की बरसात लिये, न जाने कब से तन्हा हूँ...!! .....इंदर भोले नाथ


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