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ज़िंदगी तू...

ज़िंदगी तू मुझसे कितनी ख़फ़ा हैं, ये दर्द हर समय हर दफ़ा हैं। ज़िंदगी तेरे चेहरे कितने हज़ार हैं, हर चेहरे के पीछे दूसरा तय्यार है।

By ila garg
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