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गिरती...

“ गिरती ,सँभलती , लहराती रहती हूँ, मेरे भावों के लहरों पर कितने दुःख के थपेड़े पड़े है। " तुम क्या समझोगे एक नदी की आत्म-कथा"। अनीता मिश्रा सिद्धि । हजारीबाग झारखण्ड शुक्रवार ”

By Anita Mishra
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