आज फिर उस चाँद को देख नीयत बिगड़ी, आज फिर उस आसमान में सलामे इश्क़ हुआ कुबूल, आज फिर उस चाँद को देख नीयत बिगड़ी, आज फिर उस आसमान में सलामे इश्क़ हुआ कुबूल,
'यूँ तो रखा ही था ताज़ सर पर, के हो जाएंगे उस पार, डूब गई वो नाव जिसे, समंदर ने ना जलने दिया!' समंदर,... 'यूँ तो रखा ही था ताज़ सर पर, के हो जाएंगे उस पार, डूब गई वो नाव जिसे, समंदर ने न...