ज़ंजीर
ज़ंजीर
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सोच की ज़ंजीरो ने
ऐसे पकड़ के रखा हैं,
जेल के कैदी की तरह
जकड़ के रखा हैं |
कुछ भी अच्छा करने चलो
तो ये जकड़ लेती है,
और जोर से खींच कर
पीछे की ओर पटक देती हैं |
इनकी मज़बूती के तो क्या कहने
बिना दिखे अच्छे-अच्छो को बर्बाद किया है,
किसी ने आत्मविश्वास खोया है
तो कोई उम्र भर रोया है |
ऐसी ज़ंजीरे हर व्यक्ति मैं पाई जाती है
जैसे -"लोग क्या कहेंगे "
"मुझसे नहीं होगा "
"मेरी तो किस्मत ही खराब है "
"मैं यह नहीं कर सकता"
जो इन ज़ंजीरो मैं कैद हो जाते है
वह ज़िन्दगी भर पछताते है,
और जो इन्हे तोड़ने की हिम्मत भरते है
वही ज़िन्दगी मै दुखों से जीता करते है |
