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अनिल कुमार गुप्ता अंजुम

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अनिल कुमार गुप्ता अंजुम

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यादों के दरीचे से

यादों के दरीचे से

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यादों के दरीचे से

यादों के दरीचे से
कुछ पुष्प चुरा लाया हूँ
बीते हुए लम्हों से
कुछ यादें चुरा लाया हूँ l

बचपन की यादों की महक
माँ का स्नेह चुरा लाया हूँ
भाई – बहन का रूठना
और मनाना साथ लाया हूँ l

उस पगली को क्या समझाता
मुहब्बत का सबब
चीर अपना दिल
उसे दिखा के आया हूँ l

खिले हुए रिश्तों की महक
स्नेह का समंदर चुरा के लाया हूँ
माँ की लोरियों का रस
पिता का आशीर्वाद अपार लाया हूँ ll

अनिल कुमार गुप्ता "अंजुम"


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