मेरे जीवन में मंद - मंद पवन की तरह आई हो तुम - अनिल कुमार गुप्ता "अंजुम"
मेरे जीवन में मंद - मंद पवन की तरह आई हो तुम - अनिल कुमार गुप्ता "अंजुम"
मेरे जीवन में मंद - मंद पवन की तरह आई हो तुम
मेरे जीवन में मंद – मंद पवन की तरह आई हो तुम
घनी धूप में छाया बन आई हो तुम
भटक रहा था , अँधेरी गुफा में कहीं
उजाला बन . अन्धेरा मिटाने आई हो तुम
ग़मों के समंदर से बाहर निकाल देती हो तुम
जीवन को एक नयी दिशा दिखाने आई हो तुम
शुक्रगुज़ार हूँ तुम्हारा , जीवन संगिनी मेरी
क्या खूब नेमत लेकर , मेरी जिन्दगी में आई हो तुम
मेरे जीवन में मंद – मंद पवन की तरह आई हो तुम
घनी धूप में छाया बन आई हो तुम
भटक रहा था , अँधेरी गुफा में कहीं
उजाला बन . अन्धेरा मिटाने आई हो तुम
“अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस मेरी जीवन संगिनी को मेरी ओर से समर्पित”
अनिल कुमार गुप्ता "अंजुम"
